भूपेंद्र सैनी की पहली ‘बड़ी चूक’: स्पीकर ओम बिड़ला की फोटो लगाकर भाजपा को भारी राजनीतिक शर्मिंदगी का खतरा ।
सवैधानिक पद
28-11-2025 4:15 PM | Update Bharat
जयपुर
भाजपा की नई कार्यकारिणी घोषित होने के बाद प्रदेशभर में बधाइयों का दौर शुरू हो गया है। नई टीम में कुछ पुराने चेहरों को बरकरार रखा गया है, वहीं कई नए चेहरों को भी अहम जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। इसी उत्साह में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जयपुर स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर और बैनर लगाकर खुशी जाहिर की—लेकिन इसी जल्दबाज़ी में एक गंभीर और संवैधानिक गलती हो गई।
नए प्रदेश महामंत्री बने भूपेंद्र सैनी (पिंटू सैनी) के समर्थकों ने बधाई पोस्टर में भारत की लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला की तस्वीर लगा दी। यह कदम सीधे तौर पर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन माना जा रहा है।
ग़ौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष एक तटस्थ संवैधानिक पद है और किसी भी राजनीतिक दल, पार्टी कार्यक्रम, प्रचार, रैली या संगठनात्मक पोस्टर में उनकी फोटो का उपयोग पूरी तरह गलत माना गया है।
संवैधानिक नियम साफ़ कहते हैं कि स्पीकर की तस्वीर केवल गैर-राजनीतिक, सरकारी, या राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में ही लगाई जा सकती है। स्पष्ट है कि भाजपा की नई टीम के उत्साह में इस बुनियादी मर्यादा को नजरअंदाज कर दिया गया।
और सबसे हैरानी की बात यह है कि भूपेंद्र सैनी की यह गलती पहली बार नहीं है।
इससे पहले भी उनके समर्थक उनके जन्मदिन पर प्रदेश कार्यालय के बाहर ऐसे ही संवैधानिक पद पर बैठे लोकसभा अध्यक्ष की फोटो लगाकर नियमों की धज्जियां उड़ा चुके हैं, लेकिन तब भी पार्टी के किसी बड़े नेता की नज़र उन होर्डिंग्स पर नहीं पड़ी।
अब सवाल यह खड़ा होता है कि—
क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर पार्टी के कुछ लोग खुलेआम संविधान और पार्टी संविधान दिवस को केवल दिखावे के तौर पर मानते हैं?
यही नहीं, पोस्टर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर भी ऐसे ही शामिल कर दी गई, जबकि वे पार्टी संगठन के किसी पद पर आसीन नहीं हैं। यह भी राजनीतिक सलीके की दूसरी बड़ी चूक मानी जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या भाजपा कार्यालय के बाहर लगी विवादित होर्डिंग हटाई जाएगी?
क्या कांग्रेस को बैठे-बैठाए एक नया मुद्दा मिल गया है?
या फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नए प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी (पिंटू सैनी) और उनके समर्थकों की इन बार-बार होती गलतियों पर कोई कार्रवाई करेगा?
नई कार्यकारिणी की घोषणा के तुरंत बाद हुई यह गलती न केवल अंदरूनी अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि भाजपा के लिए राजनीतिक शर्मिंदगी का बड़ा कारण भी बनती जा रही है।
