अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

13-02-2026 12:46 PM | Update Bharat
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जयपुर। परकोटा क्षेत्र स्थित चांदपोल गेट के बाहर बन रही दरगाह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी और हवा महल से भाजपा विधायक बाल मुकुंद आचार्य इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, जबकि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
अमीन कागज़ी का कहना है कि दरगाह निर्माण विधायक फंड से तथा पूरी सरकारी प्रक्रिया के तहत स्वीकृत है। उनके अनुसार विधायक फंड से होने वाला प्रत्येक कार्य राज्य सरकार के तय मानदंडों और प्रशासनिक अनुमोदन के बाद ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि अपने सात वर्ष के कार्यकाल में पहली बार किसी दरगाह के लिए फंड का उपयोग किया गया है, जबकि पूर्व में कई मंदिरों में भी विधायक फंड से कार्य कराए गए हैं।
आदर्श नगर से कांग्रेस विधायक रफीक खान ने भी इस मामले में कागज़ी का समर्थन किया है और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
वहीं बाल मुकुंद आचार्य ने निर्माण को नियमों के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही है तथा एक कथित फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की है। इस पर कागज़ी ने कहा है कि वे पुलिस कमिश्नर के समक्ष जाकर विधिसम्मत कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
नगर निगम की भूमिका पर सवाल
जयपुर का परकोटा क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और यहां निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में प्रमुख सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो नगर निगम ने अनुमति कैसे दी?
शहर में लगातार बढ़ते अवैध निर्माणों को लेकर भी नागरिकों में असंतोष है। आलोचकों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट और हेरिटेज संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देश परकोटा क्षेत्र में लागू हैं, तो फिर अन्य स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माणों पर समान कठोरता क्यों नहीं दिखाई जाती?
क्या नगर निगम के अधिकारियों द्वारा समुचित स्थल निरीक्षण किया गया था?
क्या विधायक फंड से जुड़े कार्यों की तकनीकी जांच पूरी की गई?
इन प्रश्नों के उत्तर अभी स्पष्ट नहीं हैं।
राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में
भाजपा के अन्य जनप्रतिनिधियों — सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा, झोटवाड़ा से विधायक कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विद्याधर नगर से विधायक एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, बगरू से विधायक कैलाश वर्मा, जयपुर सांसद मंजू शर्मा, किशनपोल से भाजपा प्रत्याशी चन्द्र मोहन वटवाड़ा तथा आदर्श नगर से भाजपा प्रत्याशी रवि नयर — की ओर से अब तक इस विषय पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री की नीति पर निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति की भी चर्चा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए, वहीं यदि प्रक्रिया पूरी तरह वैध है तो स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जयपुर अपनी विश्व धरोहर पहचान और सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। ऐसे में अपेक्षा की जा रही है कि विवाद का समाधान कानून और पारदर्शिता के आधार पर हो, ताकि विरासत और व्यवस्था दोनों सुरक्षित रह सकें।

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अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम अमीन कागज़ी–बाल मुकुंद आमने-सामने: चांदपोल दरगाह विवाद में नगर निगम की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

13-02-2026 12:46 PM | Update Bharat
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जयपुर। परकोटा क्षेत्र स्थित चांदपोल गेट के बाहर बन रही दरगाह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी और हवा महल से भाजपा विधायक बाल मुकुंद आचार्य इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, जबकि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
अमीन कागज़ी का कहना है कि दरगाह निर्माण विधायक फंड से तथा पूरी सरकारी प्रक्रिया के तहत स्वीकृत है। उनके अनुसार विधायक फंड से होने वाला प्रत्येक कार्य राज्य सरकार के तय मानदंडों और प्रशासनिक अनुमोदन के बाद ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि अपने सात वर्ष के कार्यकाल में पहली बार किसी दरगाह के लिए फंड का उपयोग किया गया है, जबकि पूर्व में कई मंदिरों में भी विधायक फंड से कार्य कराए गए हैं।
आदर्श नगर से कांग्रेस विधायक रफीक खान ने भी इस मामले में कागज़ी का समर्थन किया है और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
वहीं बाल मुकुंद आचार्य ने निर्माण को नियमों के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही है तथा एक कथित फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की है। इस पर कागज़ी ने कहा है कि वे पुलिस कमिश्नर के समक्ष जाकर विधिसम्मत कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
नगर निगम की भूमिका पर सवाल
जयपुर का परकोटा क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और यहां निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में प्रमुख सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो नगर निगम ने अनुमति कैसे दी?
शहर में लगातार बढ़ते अवैध निर्माणों को लेकर भी नागरिकों में असंतोष है। आलोचकों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट और हेरिटेज संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देश परकोटा क्षेत्र में लागू हैं, तो फिर अन्य स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माणों पर समान कठोरता क्यों नहीं दिखाई जाती?
क्या नगर निगम के अधिकारियों द्वारा समुचित स्थल निरीक्षण किया गया था?
क्या विधायक फंड से जुड़े कार्यों की तकनीकी जांच पूरी की गई?
इन प्रश्नों के उत्तर अभी स्पष्ट नहीं हैं।
राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में
भाजपा के अन्य जनप्रतिनिधियों — सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा, झोटवाड़ा से विधायक कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विद्याधर नगर से विधायक एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, बगरू से विधायक कैलाश वर्मा, जयपुर सांसद मंजू शर्मा, किशनपोल से भाजपा प्रत्याशी चन्द्र मोहन वटवाड़ा तथा आदर्श नगर से भाजपा प्रत्याशी रवि नयर — की ओर से अब तक इस विषय पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री की नीति पर निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति की भी चर्चा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए, वहीं यदि प्रक्रिया पूरी तरह वैध है तो स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जयपुर अपनी विश्व धरोहर पहचान और सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। ऐसे में अपेक्षा की जा रही है कि विवाद का समाधान कानून और पारदर्शिता के आधार पर हो, ताकि विरासत और व्यवस्था दोनों सुरक्षित रह सकें।

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