“मेरी खामोशी को कमजोरी न समझें” — मदन राठौड़ की , 41 नामों की लिस्ट बनी चर्चा का केंद्र ।

भाजपा मीडिया की लिस्ट

30-01-2026 11:18 AM | Update Bharat
Main news


जयपुर।
राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की मौजूदगी में हुई अहम बैठक अब पार्टी के भीतर असंतोष और अव्यवस्था की तस्वीर पेश करती नजर आ रही है। मीडिया संयोजकों, प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में मदन राठौड़ का तेवर साफ तौर पर सख्त दिखा। उन्होंने मीडिया मैनेजमेंट को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए दो टूक कहा — “मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी न समझें।”
बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल 41 नामों की जारी सूची को लेकर खड़ा हो गया है। इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो अब तक मेनस्ट्रीम मीडिया डिबेट में दिखाई ही नहीं दिए। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे चेहरे विपक्ष के आक्रामक प्रवक्ताओं के सामने पार्टी की लाइन को मजबूती से रख पाएंगे या फिर सिर्फ यूट्यूब डिबेट तक ही सीमित रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार सूची में एक नाम ऐसा भी शामिल किया गया है, जिसे पहले स्वयं मीडिया संयोजक ने हटाया था। उस समय संबंधित व्यक्ति पर पैसे लेकर पैनलिस्ट बनाने जैसे आरोप भी सामने आए थे। हैरानी की बात यह है कि इस बार वही मीडिया संयोजक उसी नाम को अपनी नई सूची में शामिल करते नजर आए। अब यह मजबूरी थी या ऊपर से कोई दबाव — इसका जवाब मीडिया संयोजक को ही देना होगा।
सूत्रों की मानें तो मदन राठौड़ ने मीडिया संयोजक और डिबेट कोऑर्डिनेटर की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि सूची में योग्यता से ज्यादा “सिफारिश” और “जुगाड़” का असर नजर आ रहा है। कई अनुभवी और जमीन से जुड़े नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि कुछ कमजोर नामों को आगे बढ़ाया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जारी सूची में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन प्रवक्ता है और कौन पैनलिस्ट। नामों के आगे कोई पद नहीं लिखा गया, जिससे पूरी लिस्ट खुद एक पहेली बन चुकी है। इससे पार्टी की मीडिया रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भाजपा को टीवी डिबेट के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे किन चेहरों को प्राथमिकता दी जाती है और किन्हें साइडलाइन किया जाता है।
कुल मिलाकर मदन राठौड़ की सख्त चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी नेतृत्व अब मीडिया फ्रंट पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है।

नोट : यह पूरी खबर सूत्रों के हवाले से लिखी गई है।

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30-01-2026 11:18 AM | Update Bharat
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जयपुर।
राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की मौजूदगी में हुई अहम बैठक अब पार्टी के भीतर असंतोष और अव्यवस्था की तस्वीर पेश करती नजर आ रही है। मीडिया संयोजकों, प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में मदन राठौड़ का तेवर साफ तौर पर सख्त दिखा। उन्होंने मीडिया मैनेजमेंट को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए दो टूक कहा — “मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी न समझें।”
बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल 41 नामों की जारी सूची को लेकर खड़ा हो गया है। इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो अब तक मेनस्ट्रीम मीडिया डिबेट में दिखाई ही नहीं दिए। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे चेहरे विपक्ष के आक्रामक प्रवक्ताओं के सामने पार्टी की लाइन को मजबूती से रख पाएंगे या फिर सिर्फ यूट्यूब डिबेट तक ही सीमित रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार सूची में एक नाम ऐसा भी शामिल किया गया है, जिसे पहले स्वयं मीडिया संयोजक ने हटाया था। उस समय संबंधित व्यक्ति पर पैसे लेकर पैनलिस्ट बनाने जैसे आरोप भी सामने आए थे। हैरानी की बात यह है कि इस बार वही मीडिया संयोजक उसी नाम को अपनी नई सूची में शामिल करते नजर आए। अब यह मजबूरी थी या ऊपर से कोई दबाव — इसका जवाब मीडिया संयोजक को ही देना होगा।
सूत्रों की मानें तो मदन राठौड़ ने मीडिया संयोजक और डिबेट कोऑर्डिनेटर की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि सूची में योग्यता से ज्यादा “सिफारिश” और “जुगाड़” का असर नजर आ रहा है। कई अनुभवी और जमीन से जुड़े नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि कुछ कमजोर नामों को आगे बढ़ाया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जारी सूची में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन प्रवक्ता है और कौन पैनलिस्ट। नामों के आगे कोई पद नहीं लिखा गया, जिससे पूरी लिस्ट खुद एक पहेली बन चुकी है। इससे पार्टी की मीडिया रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भाजपा को टीवी डिबेट के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे किन चेहरों को प्राथमिकता दी जाती है और किन्हें साइडलाइन किया जाता है।
कुल मिलाकर मदन राठौड़ की सख्त चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी नेतृत्व अब मीडिया फ्रंट पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है।

नोट : यह पूरी खबर सूत्रों के हवाले से लिखी गई है।

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