“मीडिया फ्रंट पर एक्शन मोड में भाजपा” — मदन राठौड़ की सख्त हिदायतों के बाद संगठन में हलचल, नई टीम से बढ़ी उम्मीदें जयपुर।

सरकार की योजनाओं को आम जन तक पहुँचाया जा सके उसके लिए जंबो लिस्ट ।

30-01-2026 8:43 PM | Update Bharat
Main news


राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में हुई हालिया अहम बैठक के बाद पार्टी की मीडिया रणनीति को लेकर बड़ा संदेश सामने आया है। बैठक में मीडिया संयोजकों, प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की मौजूदगी के बीच मदन राठौड़ का स्पष्ट और दृढ़ रुख देखने को मिला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा — “मेरी खामोशी को कमजोरी न समझें” — जो यह संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व अब मीडिया मोर्चे पर पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ने के मूड में है।
बैठक के बाद जारी 41 नामों की प्रारंभिक सूची और फिर 17 नामों की पूरक सूची ने यह साफ कर दिया कि संगठन अब मीडिया फ्रंट को लेकर गंभीरता से मंथन कर रहा है। कुल 58 प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की टीम बनाकर पार्टी ने हर वर्ग, क्षेत्र और सामाजिक संतुलन को साधने की कोशिश की है। इसे आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कवायद केवल नाम तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि टीवी डिबेट, डिजिटल मीडिया और जमीनी मुद्दों पर पार्टी की आवाज को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नई सूची में युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं का संयोजन तैयार करने की कोशिश की गई है, ताकि हर मंच पर भाजपा का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सके।
हालांकि, संगठन के भीतर कुछ सवाल भी उठे हैं। शुरुआती सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल थे जो मुख्यधारा मीडिया में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे, जिस पर फीडबैक सामने आया। इसी फीडबैक के आधार पर अतिरिक्त सूची जारी कर संतुलन बनाने का प्रयास किया गया। इसे पार्टी के भीतर आत्ममंथन और सुधार की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
सबसे अहम बात यह है कि नेतृत्व स्तर पर स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि मीडिया मैनेजमेंट में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं होगी। मदन राठौड़ की सख्त हिदायतों के बाद मीडिया संयोजकों और डिबेट कोऑर्डिनेटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब प्रदर्शन के आधार पर चेहरों को आगे बढ़ाने की नीति पर काम होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह सक्रियता आगामी चुनावी माहौल में पार्टी को मीडिया के मोर्चे पर मजबूत स्थिति में ला सकती है। अगर नई टीम जमीनी मुद्दों और संगठनात्मक संदेश को सही तरीके से जनता तक पहुंचाने में सफल रहती है, तो इसका सीधा लाभ पार्टी को मिल सकता है।
कुल मिलाकर यह साफ है कि भाजपा ने मीडिया फ्रंट पर अब डैमेज कंट्रोल नहीं, बल्कि स्ट्रॉन्ग रीबिल्डिंग मोड में कदम रखा है। मदन राठौड़ की सख्ती और संगठन की नई संरचना आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श की दिशा तय कर सकती है।
 

नोट : यह पूरी खबर विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से तैयार की गई है।

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“मीडिया फ्रंट पर एक्शन मोड में भाजपा” — मदन राठौड़ की सख्त हिदायतों के बाद संगठन में हलचल, नई टीम से बढ़ी उम्मीदें जयपुर।

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राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में हुई हालिया अहम बैठक के बाद पार्टी की मीडिया रणनीति को लेकर बड़ा संदेश सामने आया है। बैठक में मीडिया संयोजकों, प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की मौजूदगी के बीच मदन राठौड़ का स्पष्ट और दृढ़ रुख देखने को मिला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा — “मेरी खामोशी को कमजोरी न समझें” — जो यह संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व अब मीडिया मोर्चे पर पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ने के मूड में है।
बैठक के बाद जारी 41 नामों की प्रारंभिक सूची और फिर 17 नामों की पूरक सूची ने यह साफ कर दिया कि संगठन अब मीडिया फ्रंट को लेकर गंभीरता से मंथन कर रहा है। कुल 58 प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की टीम बनाकर पार्टी ने हर वर्ग, क्षेत्र और सामाजिक संतुलन को साधने की कोशिश की है। इसे आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कवायद केवल नाम तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि टीवी डिबेट, डिजिटल मीडिया और जमीनी मुद्दों पर पार्टी की आवाज को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नई सूची में युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं का संयोजन तैयार करने की कोशिश की गई है, ताकि हर मंच पर भाजपा का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सके।
हालांकि, संगठन के भीतर कुछ सवाल भी उठे हैं। शुरुआती सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल थे जो मुख्यधारा मीडिया में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे, जिस पर फीडबैक सामने आया। इसी फीडबैक के आधार पर अतिरिक्त सूची जारी कर संतुलन बनाने का प्रयास किया गया। इसे पार्टी के भीतर आत्ममंथन और सुधार की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
सबसे अहम बात यह है कि नेतृत्व स्तर पर स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि मीडिया मैनेजमेंट में लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं होगी। मदन राठौड़ की सख्त हिदायतों के बाद मीडिया संयोजकों और डिबेट कोऑर्डिनेटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब प्रदर्शन के आधार पर चेहरों को आगे बढ़ाने की नीति पर काम होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह सक्रियता आगामी चुनावी माहौल में पार्टी को मीडिया के मोर्चे पर मजबूत स्थिति में ला सकती है। अगर नई टीम जमीनी मुद्दों और संगठनात्मक संदेश को सही तरीके से जनता तक पहुंचाने में सफल रहती है, तो इसका सीधा लाभ पार्टी को मिल सकता है।
कुल मिलाकर यह साफ है कि भाजपा ने मीडिया फ्रंट पर अब डैमेज कंट्रोल नहीं, बल्कि स्ट्रॉन्ग रीबिल्डिंग मोड में कदम रखा है। मदन राठौड़ की सख्ती और संगठन की नई संरचना आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श की दिशा तय कर सकती है।
 

नोट : यह पूरी खबर विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से तैयार की गई है।

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