“बधाई की होड़ में भूला संगठन: महिला मोर्चा में शुरुआत से ही दिखी असंगठित तस्वीर”
“बधाई की होड़ में भूला संगठन: महिला मोर्चा में शुरुआत से ही दिखी असंगठित तस्वीर”
31-03-2026 10:24 PM | Update Bharat
जयपुर। भाजपा महिला मोर्चा की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही जिस उत्साह और एकजुटता की उम्मीद की जा रही थी, उसकी जगह असंगठन, जल्दबाजी और अनुशासनहीनता की तस्वीर सामने आई। सूची जारी होते ही कई नामित महिलाएं सीधे प्रदेश कार्यालय पहुंचकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को बधाई देती नजर आईं—वो भी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ की गैरमौजूदगी में।
इस घटनाक्रम ने संगठनात्मक अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब टीम का नेतृत्व करने वाली अध्यक्ष ही साथ नहीं थी, तब अलग-अलग जाकर बधाई देने की होड़ यह संकेत देती है कि नई टीम में समन्वय की कमी शुरुआत से ही नजर आ रही है।
सूत्र बताते हैं कि इस टीम में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जो कभी-कभार ही प्रदेश कार्यालय में नजर आते थे। वहीं “युवा टीम” कहे जाने वाले इस गठन में दो महिलाएं 60 वर्ष से अधिक उम्र की भी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वे ऊर्जावान नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल पाएंगी या नहीं।
इतना ही नहीं, जिन महिलाओं को पूर्व अध्यक्ष रक्षा भंडारी के समय भी जिम्मेदारी मिली थी, उनकी पिछली परफॉर्मेंस को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के भीतर ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके काम का आकलन किया गया था या केवल नाम के आधार पर उन्हें फिर से मौका दे दिया गया।
यह भी चर्चा है कि कुछ महिलाएं केवल पद प्राप्ति के उद्देश्य से सक्रिय हुई हैं। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या सूची जारी करने से पहले जमीनी काम और समर्पण को प्राथमिकता दी गई या नहीं।
शुरुआती घटनाक्रम से साफ संकेत मिल रहा है कि नई टीम में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और गुटबाज़ी आगे चलकर बड़ी चुनौती बन सकती है। जिस तरह से अलग-अलग जाकर शक्ति प्रदर्शन किया गया, उसने यह दिखा दिया है कि कई चेहरे अपने-अपने प्रभाव को स्थापित करने की होड़ में हैं।
हालांकि इन तमाम सवालों के बीच महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ को एक प्रखर और सक्रिय नेता माना जाता है, जो लगातार महिलाओं के हितों की आवाज उठाती रही हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि वे इस बिखराव को संभाल पाएंगी।
लेकिन जिस तरह का नजारा शुरुआत में ही देखने को मिला, उससे यह संकेत जरूर मिल गया है कि राखी राठौड़ की राह आसान नहीं होगी। संगठन को एकजुट रखना और अनुशासन कायम करना अब उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।
आखिरकार, राजनीति में वही टिकता है जो काम के दम पर अपनी पहचान बनाता है—
“पद नाम से नहीं, काम से मिलता है।”
नोट: यह पूरी खबर सूत्रों के हवाले से लिखी गई है। इसमें Update Bharat.com की टीम का कोई प्रत्यक्ष संबंध या पुष्टि शामिल नहीं है।












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