“महिला मोर्चा में ‘नए चेहरे vs पुराने चेहरे’ की जंग, फैसला करेगा सियासी भविष्य”

“महिला मोर्चा में ‘नए चेहरे vs पुराने चेहरे’ की जंग, फैसला करेगा सियासी भविष्य”

28-03-2026 12:12 PM | Update Bharat
Main news

राजस्थान भाजपा के विभिन्न मोर्चों की घोषणाओं को लेकर सियासी हलकों में इन दिनों चर्चा तेज हो गई है। करीब 2–3 महीने पहले प्रदेश भाजपा ने अपने मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक अधिकांश मोर्चों की कार्यकारिणी का गठन अधूरा है। केवल एससी मोर्चा की टीम सामने आई है, जबकि एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला

और किसान मोर्चा अब भी इंतजार में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस देरी के पीछे वजह क्या है? क्या पार्टी संगठन स्तर पर गहन मंथन कर रही है या फिर नए चेहरों को मौका देने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है? यह भी चर्चा है कि कहीं फिर से पुराने चेहरों पर ही भरोसा तो नहीं जताया जाएगा।

महिला मोर्चा पर सबसे ज्यादा नजर
इन सभी में सबसे अधिक निगाहें महिला मोर्चा पर टिकी हुई हैं। प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत और प्रभावी टीम खड़ी करने की है। क्योंकि महिला मोर्चा न केवल संगठन का अहम हिस्सा होता है, बल्कि महिलाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी भी माना जाता है।
राखी राठौड़ की कार्यशैली को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे ऊर्जावान और जमीन पर काम करने वाली टीम चाहेंगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी वही पुराने चेहरे टीम में शामिल होंगे, जो लंबे समय से संगठन के इर्द-गिर्द सक्रिय हैं, या फिर नई महिलाओं को मौका मिलेगा?
पुराने चेहरों पर उठ रहे सवाल
पार्टी के अंदर ही यह चर्चा है कि कुछ नाम—निकिता राठौड़, अंजू मिश्रा, अनुराधा माहेश्वरी, शिखा वैद, वर्तिका सैन और मीना चटर्जी—लगातार हर कार्यकाल में नजर आते रहे हैं। लेकिन अब इस पर एक नया सवाल भी खड़ा हो गया है।
सूत्र बताते हैं कि जब भी महिला मोर्चा अध्यक्ष की कोई फोटो सामने आती है, तो उनमें भी अक्सर यही चेहरे दिखाई देते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही बनता है कि क्या महिला मोर्चा के पास नई और सक्रिय महिलाओं की कमी है?
अगर वास्तव में महिलाओं की कमी है, तो फिर पुराने चेहरों को ही बनाए रखना एक मजबूरी हो सकती है। लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो फिर बदलाव का समय आ चुका है।
बदलाव का मौका या चूक?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि इस बार नई महिलाओं को मौका दिया जाता है, तो इससे न केवल संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि राखी राठौड़ की राजनीति भी एक नए इतिहास की ओर बढ़ती दिखाई दे सकती है।
हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि वे अपने आसपास लंबे समय से मौजूद सीमित दायरे को तोड़ें और उन महिलाओं को भी आगे लाएं जो वास्तव में जमीन पर काम कर सकती हैं।

भाजपा के मोर्चों की टीमों की घोषणा में हो रही देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी बदलाव की राह चुनती है या फिर पुराने समीकरणों को ही दोहराती है। खासकर महिला मोर्चा में लिया गया फैसला आने वाले समय में संगठन की दिशा और दशा दोनों तय करेगा—और यही फैसला तय करेगा कि यह कार्यकाल एक सामान्य अध्याय बनेगा या फिर एक नया इतिहास लिखेगा।

नोट
फ़ोटो राखी राठौड की FB से ली गई है और दूसरी भाजपा के व्हाट्सऐप ग्रुप से ली गई है ।

📢 Share this news:
© 2026 Update Bharat | All Rights Reserved

Related News

All News

Sidebar Content

“महिला मोर्चा में ‘नए चेहरे vs पुराने चेहरे’ की जंग, फैसला करेगा सियासी भविष्य”

“महिला मोर्चा में ‘नए चेहरे vs पुराने चेहरे’ की जंग, फैसला करेगा सियासी भविष्य”

28-03-2026 12:12 PM | Update Bharat
Main news

राजस्थान भाजपा के विभिन्न मोर्चों की घोषणाओं को लेकर सियासी हलकों में इन दिनों चर्चा तेज हो गई है। करीब 2–3 महीने पहले प्रदेश भाजपा ने अपने मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक अधिकांश मोर्चों की कार्यकारिणी का गठन अधूरा है। केवल एससी मोर्चा की टीम सामने आई है, जबकि एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला

और किसान मोर्चा अब भी इंतजार में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस देरी के पीछे वजह क्या है? क्या पार्टी संगठन स्तर पर गहन मंथन कर रही है या फिर नए चेहरों को मौका देने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है? यह भी चर्चा है कि कहीं फिर से पुराने चेहरों पर ही भरोसा तो नहीं जताया जाएगा।

महिला मोर्चा पर सबसे ज्यादा नजर
इन सभी में सबसे अधिक निगाहें महिला मोर्चा पर टिकी हुई हैं। प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत और प्रभावी टीम खड़ी करने की है। क्योंकि महिला मोर्चा न केवल संगठन का अहम हिस्सा होता है, बल्कि महिलाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी भी माना जाता है।
राखी राठौड़ की कार्यशैली को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे ऊर्जावान और जमीन पर काम करने वाली टीम चाहेंगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी वही पुराने चेहरे टीम में शामिल होंगे, जो लंबे समय से संगठन के इर्द-गिर्द सक्रिय हैं, या फिर नई महिलाओं को मौका मिलेगा?
पुराने चेहरों पर उठ रहे सवाल
पार्टी के अंदर ही यह चर्चा है कि कुछ नाम—निकिता राठौड़, अंजू मिश्रा, अनुराधा माहेश्वरी, शिखा वैद, वर्तिका सैन और मीना चटर्जी—लगातार हर कार्यकाल में नजर आते रहे हैं। लेकिन अब इस पर एक नया सवाल भी खड़ा हो गया है।
सूत्र बताते हैं कि जब भी महिला मोर्चा अध्यक्ष की कोई फोटो सामने आती है, तो उनमें भी अक्सर यही चेहरे दिखाई देते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही बनता है कि क्या महिला मोर्चा के पास नई और सक्रिय महिलाओं की कमी है?
अगर वास्तव में महिलाओं की कमी है, तो फिर पुराने चेहरों को ही बनाए रखना एक मजबूरी हो सकती है। लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो फिर बदलाव का समय आ चुका है।
बदलाव का मौका या चूक?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि इस बार नई महिलाओं को मौका दिया जाता है, तो इससे न केवल संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि राखी राठौड़ की राजनीति भी एक नए इतिहास की ओर बढ़ती दिखाई दे सकती है।
हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि वे अपने आसपास लंबे समय से मौजूद सीमित दायरे को तोड़ें और उन महिलाओं को भी आगे लाएं जो वास्तव में जमीन पर काम कर सकती हैं।

भाजपा के मोर्चों की टीमों की घोषणा में हो रही देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी बदलाव की राह चुनती है या फिर पुराने समीकरणों को ही दोहराती है। खासकर महिला मोर्चा में लिया गया फैसला आने वाले समय में संगठन की दिशा और दशा दोनों तय करेगा—और यही फैसला तय करेगा कि यह कार्यकाल एक सामान्य अध्याय बनेगा या फिर एक नया इतिहास लिखेगा।

नोट
फ़ोटो राखी राठौड की FB से ली गई है और दूसरी भाजपा के व्हाट्सऐप ग्रुप से ली गई है ।

📢 Share this news:
© 2026 Update Bharat | All Rights Reserved

Related News

All News